🏛️ परिचय: रिकॉर्ड 10वीं बार मुख्यमंत्री
गुरुवार, 20 नवंबर 2025, को बिहार की राजधानी पटना का ऐतिहासिक गांधी मैदान एक अभूतपूर्व राजनीतिक घटना का गवाह बना। नीतीश कुमार ने 10वीं बार ली शपथ बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेता के रूप में, यह शपथ ग्रहण न केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि भारतीय राजनीति में उनके अद्वितीय गठबंधन कौशल और दृढ़ता का प्रमाण भी है।
उनके साथ 26 मंत्रियों ने भी शपथ ली, जिनमें दो उपमुख्यमंत्री—बीजेपी के सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा—शामिल हैं। यह नया कार्यकाल बिहार के भविष्य के लिए नई उम्मीदों और चुनौतियों का मिश्रण लेकर आया है।

गठबंधन गुरु: नीतीश कुमार की राजनीतिक यात्रा
नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर सादगी, संघर्ष और सत्ता के दाँव-पेंच से भरा रहा है। उन्हें भारतीय राजनीति के उन चुनिंदा नेताओं में गिना जाता है जिन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर नरेंद्र मोदी तक और लालू प्रसाद यादव से लेकर तेजस्वी यादव तक, लगभग हर प्रमुख दल के साथ गठबंधन किया है।
| कार्यकाल का चरण | अवधि/वर्ष | मुख्य पद और घटनाक्रम |
| जेपी आंदोलन | 1974-1977 | जयप्रकाश नारायण (JP) के संपूर्ण क्रांति आंदोलन में सक्रिय। |
| पहला विधायक | 1985 | हरनौत (नालंदा) से पहली बार विधानसभा में प्रवेश। |
| राष्ट्रीय राजनीति | 1990-2004 | केंद्रीय रेलवे मंत्री और कृषि मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण योगदान। |
| जनता दल (यूनाइटेड) | 2003 | समता पार्टी का जनता दल (यूनाइटेड) (JDU) में विलय। |
| पहला CM कार्यकाल | मार्च 2000 | केवल 7 दिन में बहुमत न होने के कारण इस्तीफा दिया। |
| सुशासन की नींव | 2005-2013 | पहली बार पूर्ण बहुमत (NDA) के साथ सरकार बनाई, जिसे सुशासन बाबू का दौर कहा गया। |
आँकड़े और विकास: ‘सुशासन’ की कहानी
नीतीश कुमार के कार्यकाल को बिहार में विकासात्मक गति (Developmental Momentum) के लिए याद किया जाता है। विशेष रूप से 2005 के बाद, उनका प्राथमिक फोकस कानून-व्यवस्था (Law & Order) में सुधार और आधारभूत संरचना (Infrastructure) के निर्माण पर रहा।
GSDP वृद्धि: विकास की धुरी
उनके शुरुआती कार्यकाल में बिहार की अर्थव्यवस्था ने तेज़ी से उड़ान भरी। सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) की वृद्धि दर कई वर्षों तक राष्ट्रीय औसत से अधिक रही।
| अवधि/वर्ष | GSDP वृद्धि दर (स्थिर मूल्य पर) |
| 2004-05 | लगभग 2.5% (पिछला शासन) |
| 2009-10 | लगभग 17.0% |
| 2019-20 | 10.5% |
| 2023-24 | 9.2% |
उपलब्धियाँ:
- सड़कें: ग्रामीण सड़कों का जाल बिछाया गया, जिससे कनेक्टिविटी में सुधार हुआ।
- महिला सशक्तिकरण: पंचायती राज संस्थानों में महिलाओं को 50% आरक्षण और ‘साइकिल योजना’ ने लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा दिया।
किसी भी दीर्घकालिक नेता की तरह, नीतीश कुमार शपथ ग्रहण करने के साथ ही सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की भावनाओं से घिरे रहते हैं।
सकारात्मक पक्ष (Positive Sentiment):

- स्थिरता: गठबंधन बदलते रहने के बावजूद, वह पिछले दो दशकों से राज्य की राजनीति का केंद्र बने हुए हैं, जो एक तरह की प्रशासनिक निरंतरता प्रदान करता है।
- विकास मॉडल: ‘सुशासन’ का मॉडल, विशेष रूप से पिछड़े राज्य में तेज वृद्धि हासिल करने के लिए एक बेंचमार्क बना।
- सामाजिक इंजीनियरिंग: उन्होंने अति-पिछड़ा वर्ग (EBC) और महिलाओं को सशक्त कर एक नया सामाजिक-राजनीतिक समीकरण बनाया।
नकारात्मक पक्ष (Negative Sentiment):
- गठबंधन की अस्थिरता: बार-बार पाला बदलने के कारण उन्हें “पलटू राम” की उपाधि मिली है, जिससे राजनीतिक विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं।
- औद्योगिकरण की कमी: बिहार की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है; उनके कार्यकाल में बड़े पैमाने पर औद्योगिक विकास और रोज़गार सृजन में अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई।
- शिक्षा और स्वास्थ्य: शिक्षा और स्वास्थ्य के बुनियादी ढाँचे में अभी भी भारी सुधार की आवश्यकता है।
➡️ निष्कर्ष: 10वें कार्यकाल की चुनौतियाँ
रिकॉर्ड 10वीं बार नीतीश कुमार शपथ लेकर अपने राजनीतिक करियर के एक नए अध्याय की शुरुआत कर रहे हैं। अब चुनौती यह है कि वह बिहार को विकास की राह पर और तेज़ गति से आगे बढ़ाएँ।
उन्हें रोज़गार सृजन, शिक्षा की गुणवत्ता और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित करना होगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बिहार का युवा पलायन न करे। गठबंधन की स्थिरता बनाए रखना भी इस कार्यकाल की एक प्रमुख आवश्यकता होगी।
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