बिहार विधानसभा चुनाव 2025 राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। इस बार सिर्फ मुख्यमंत्री कौन होगा, यह सवाल नहीं है, बल्कि यह भी चर्चा का विषय है कि गठबंधन में किनको महत्वपूर्ण हिस्सेदारी मिलेगी। इसी पृष्ठभूमि में चिराग पासवान उपमुख्यमंत्री 2025, लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) [LJP (RV)] के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री, एक अहम पलेयर बनकर उभरे हैं। उनकी बढ़ती राजनीतिक ताकत और उनकी भाषा – “मैं पद नहीं चाहता, बिहार और युवा चाहता हूँ” – ने उन्हें न सिर्फ गठबंधन में बल्कि बिहार की राजनीति में एक विश्वासपात्र और दबावकारक नेता के रूप में स्थापित कर दिया है।

चिराग की बढ़ी भूमिका और सीट शेयर सौदा

सबसे पहले सवाल यह है कि चिराग पासवान की राजनीतिक ताकत इतनी क्यों बढ़ी है। इसके कुछ स्पष्ट कारण हैं:

  1. ज़बरदस्त सौदा फॉर्मूला
    एनडीए (राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन) के अंदर सीट बंटवारे की बातचीत में चिराग पासवान ने अपनी मांगों को मजबूती से आगे रखा। नतीजा यह हुआ कि उनकी पार्टी LJP (RV) को कुल 29 विधानसभा सीटें मिल पाईं। यह संख्या न सिर्फ एक संतुलित गठबंधन की निशानी है, बल्कि यह दिखाती है कि चिराग को NDA के भीतर कमतर समझा जाने वाला खिलाड़ी नहीं माना जा रहा।
  2. राजनीतिक सौदेबाज़ी में बढ़ता दबाव
    Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक, चिराग ने सीट शेयरिंग के दौरान कड़े रुख अपनाया — और उनकी मांगों का NDA नेतृत्व ने सम्मान किया। उनमें वह जज्बा था कि उनकी पार्टी “सम्मान और हिस्सेदारी” चाहेगी, न कि सिर्फ सीमित भूमिका।
  3. एनडीए में बढ़ती अहमियत
    बिहार चुनावों में LJP (RV) का प्रदर्शन सिर्फ सीट जीतने तक सीमित नहीं है — हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट कहती है कि उनकी पार्टी ने NDA की ताकत में इजाफा किया है, और चिराग पासवान अब गठबंधन का एक “की खिलाड़ी” बन गए हैं। इसके साथ ही, Times of India कहता है कि इस प्रदर्शन के बाद उनकी राजनीतिक बोलने और दावेदारी की शक्ति दोनों बढ़ गई है।

उपमुख्यमंत्री-दावेदारी: चिराग का स्पष्ट रुख

चिराग पासवान की उपमुख्यमंत्री बनने की अटकलें बहुत समय से चल रही हैं। लेकिन उन्होंने खुद इन बातों में एक दिलचस्प संतुलन पेश किया है:

  • दावा, पर आत्म-निराशा?
    इंडिया टुडे के इंटरव्यू में, चिराग ने कहा कि अगर NDA को निर्णायक बहुमत मिलता है और LJP (RV) उनकी सीटों में बेहतर प्रदर्शन करता है, तो वे “उपमुख्यमंत्री पद की मांग करना जायज” मानेंगे।
  • व्यक्तिगत भूमिका से दूरी
    उसी वक्त, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वो खुद तुरंत उपमुख्यमंत्री बनना नहीं चाहते। उन्होंने कहा कि उनके पास पहले से ही केंद्र में जिम्मेदारियाँ हैं (केंद्रीय मंत्री के रूप में)।
  • पद नहीं, विज़न
    बिज़नेस टुडे के साथ बातचीत में भी, चिराग ने अपने मकसद को विकास और युवाओं के सशक्तिकरण पर केंद्रित बताया। उन्होंने कहा, “मुझे पद की लालसा नहीं है … अगर विधानसभा में स्थिति बनती है, तो एक पार्टी साथी (LJP का) शायद यह भूमिका निभाए।”
  • मुख्यमंत्री की स्थिति
    उन्होंने यह भी कहा है कि एनडीए के अंदर यह तय है कि नीतीश कुमार दोबारा मुख्यमंत्री होंगे, और उनकी पार्टी (LJP RV) किसी तरह की हड़बड़ी नहीं करना चाहती, बल्कि एक सम्मानजनक हिस्सेदारी चाहती है।

राजनीतिक रणनीति: किसके लिए कदम?

चिराग पासवान की राजनीति सिर्फ मांगों तक सीमित नहीं है ‒ उनके कदम रणनीतिक रूप से बहुत सोच-समझकर उठाये गए हैं।

  1. “बिहार पहले, बिहारी पहले” एजेंडा
    चिराग ने बार-बार कहा है कि उनकी प्राथमिकता बिहार की तरक्की, युवा रोज़गार और इंफ्रास्ट्रक्चर है। उन्होंने यह संदेश दिया है कि उनकी राजनीति सिर्फ सत्ता पाने की नहीं, बल्कि विकास और जिम्मेदारी की है।
  2. एनडीए में निष्ठा और भरोसा
    उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपनी वफादारी जताई है और स्पष्ट किया है कि वे NDA में रहना चाहते हैं। इस समर्पण ने उन्हें गठबंधन के अन्य नेताओं के बीच एक भरोसेमंद साथी के रूप में स्थापित किया है।
  3. बात-चीत और दबाव की कला
    चिराग ने सीट शेयरिंग और सौदेबाज़ी में कड़े रुख के साथ-साथ बातचीत की कला भी दिखाई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी मांगें सिर्फ दिखावे की नहीं, बल्कि परिणाम आधारित हैं। इससे यह लगता है कि वो सिर्फ एक दबावकारक नेता ही नहीं, बल्कि समझौता करने वाले खिलाड़ी भी हैं।

चुनौतियाँ और जोखिम

हालाँकि चिराग पासवान की दावेदारी मजबूत दिखती है, लेकिन रास्ता सरल नहीं है। उनके सामने कई चुनौतियाँ भी हैं:

  • पद की मांग vs लोकप्रिय धारणाएँ
    अगर वे उपमुख्यमंत्री पद की मांग करते हैं — या उनकी पार्टी को वह मिलता है — तो यह अन्य NDA पार्टनर्स (जैसे BJP, JD(U)) में असंतोष पैदा कर सकता है। एक गठबंधन में, पद-वितरण हमेशा नाजुक होता है, और बड़ी मांगें कभी-कभी टूटने का कारण बन सकती हैं।
  • पद न लेने की पब्लिक छवि
    चिराग ने बार-बार कहा है कि वे व्यक्तिगत रूप से उपमुख्यमंत्री नहीं बनना चाहते। यह उनकी छवि को सकारात्मक बना सकता है (जिम्मेदार, विकास-केन्द्रित नेता), लेकिन साथ ही यह उनकी वास्तविक सत्ता महत्वाकांक्षा पर सवाल भी खड़े कर सकता है। कभी लोग यह कहना शुरू कर सकते हैं कि उनका “पद नहीं, पर महत्वाकांक्षा” छुपी हुई है।
  • भविष्य की उम्मीदें
    उन्होंने कहा है कि 2030 में उनकी स्थिति और मजबूत होगी: “2030 में मैं चुनाव में अधिक शक्ति के साथ उतरूँगा, और हो सकता है कि उस वक्त मैं मुख्यमंत्री चेहरा बन जाऊँ।” यह एक बड़ा बयान है — और अगर भविष्य में यह उम्मीद पूरे न हो, तो उनकी वर्तमान बढ़ती मांगें उन्हें जोखिम में ला सकती हैं।
  • गठबंधन में विश्वास की जरूरत
    उनकी दावेदारी के पीछे केवल सीटों की जीत ही नहीं, बल्कि गठबंधन में सम्मान की मांग है। यदि NDA अन्य पार्टनर्स के साथ चिराग की बढ़ती भूमिका को चुनौती देता है, तो यह उनकी रणनीति और राजनीतिक पूंजी पर बड़ा असर डाल सकता है।

चिराग का भावी असर: बिहार-राजनीति और beyond

चिराग पासवान की बढ़ती भूमिका सिर्फ एक चुनावी जीत की कहानी नहीं है — इसके दायरे बहुत बड़े हो सकते हैं:

  1. एनडीए के लिए साझेदार के रूप में महत्व
    अगर LJP (RV) उनके प्रदर्शन के मुताबिक सफल होती है, तो यह दर्शाता है कि NDA में सिर्फ दो या तीन बड़े खिलाड़ी ही नहीं हैं, बल्कि मध्यम आकार की पार्टियाँ भी गठबंधन को मजबूत कर सकती हैं। चिराग का दबदबा ऐसी पार्टियों के लिए प्रेरणा बन सकता है जो गठबंधन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना चाहती हैं।
  2. युवा वर्ग और विकास-राजनीति
    चिराग की युवा-केन्द्रित नीति और विकास पर जोर, खासकर बिहार जैसे राज्य में, उन्हें केवल एक शक्ति खिलाड़ी ही नहीं बनाती, बल्कि नए राजनीतिक आदर्श की ओर ले जाती है। यदि उन्हें जिम्मेदारी दी जाती है, तो वह युवाओं के एजेंडे को आगे बढ़ाने वाला चेहरा बन सकते हैं।
  3. भविष्य की संभावनाएँ
    जैसा कि उन्होंने संकेत दिया है — “2030 में मेरी स्थिति और मजबूत होगी” — अगर उनका यह विज़न सच होता है, तो वह न सिर्फ उपमुख्यमंत्री बल्कि मुख्यमंत्री चेहरा भी बन सकते हैं। उनके पास आने वाले वर्षों में यह मौका होगा कि वे बिहार में एक और नए युग की शुरुआत करें।

निष्कर्ष

तो सवाल उठता है: क्या चिराग पासवान बिहार के अगले उपमुख्यमंत्री बनेंगे? इसकी यथार्थता अब सिर्फ अटकल नहीं है — उनकी दावेदारी बैकिंग, रणनीति और गठबंधन में उनकी बढ़ती भूमिका के कारण गंभीर है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि वे पद से अधिक विकास, युवा और जिम्मेदारी चाहते हैं। लेकिन साथ ही, उन्होंने यह भी जताया है कि उनकी पार्टी सम्मान और हिस्सेदारी की मांग करेगी — और यदि उनकी सीटें मजबूत रहीं और गठबंधन में उनकी भूमिका पर्याप्त मानी गई, तो LJP (RV) के लिए उपमुख्यमंत्री पद की मांग नकारा नहीं जा सकता।

फिर भी, यह पूरा खेल केवल विकल्पित मांगों और रणनीति का नहीं है — यह विश्वास का भी है: गठबंधन में उनकी साझेदारी, उनकी टीम की पकड़, और जनता में उनके वादों की स्वीकार्यता। अगर ये घटक टिकते हैं, तो चिराग पासवान का 2025 का जनादेश सिर्फ उनका जीत का पल नहीं होगा, बल्कि बिहार की राजनीति के अगले युग का आरंभ भी हो सकता है।

References: https://economictimes.indiatimes.com/news/elections/assembly-elections/bihar/how-modis-hanuman-chirag-paswan-has-emerged-as-a-surprise-star-in-the-bihar-election-results-2025/articleshow/125318635.cms?from=mdr

internal link: https://bharatnewsai.com/bihar-election-2025-winners-ka-poora-profile/

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